UDISE+ Complete School Data Entry Guide 2026 Explained

अगर आप स्कूल में काम करते हैं, या प्रिंसिपल हैं, या फिर UDISE+ का डेटा भरने की जिम्मेदारी आपके ऊपर आ गई है, तो एक बात तो तय है. पहली बार में ये थोड़ा भारी लगता है. स्क्रीन पर ढेर सारे सेक्शन, अजीब-अजीब कोड, और ऊपर से डर कि कहीं गलत भर दिया तो ब्लॉक से फोन आ जाएगा.

तो चलिए इसे आसान करते हैं. ये पोस्ट 2026 के हिसाब से एक प्रैक्टिकल गाइड है. UDISE+ क्या है, क्यों जरूरी है, और स्कूल डेटा एंट्री करते वक्त कौन सी चीजें ध्यान में रखनी हैं.

UDISE+ क्या है?

UDISE+ का पूरा नाम है Unified District Information System for Education Plus. ये भारत सरकार (MoE) का एक सिस्टम है जिसमें देश के सभी स्कूलों का डेटा एक जगह इकट्ठा किया जाता है.

सीधी भाषा में बोलें तो.

आपके स्कूल की पहचान, इंफ्रास्ट्रक्चर, टीचर, स्टूडेंट्स, सुविधाएं, रिजल्ट, सेक्शन, एनरोलमेंट. ये सब चीजें हर साल एक फॉर्म जैसी एंट्री के जरिए UDISE+ में अपडेट होती हैं.

और फिर वही डेटा आगे चलकर बहुत सारी सरकारी प्लानिंग में यूज होता है. पैसा कहां लगेगा, किस स्कूल में शिक्षक चाहिए, किस जगह कमरे कम हैं, किस ब्लॉक में लड़कियों की एनरोलमेंट घट रही है. सबका बेस यही है.

UDISE+ नंबर क्या होता है?

हर स्कूल को एक UDISE Code/UDISE Number दिया जाता है. ये स्कूल का यूनिक आईडी नंबर है.

  • सरकारी, सहायता प्राप्त, प्राइवेट. सभी के लिए
  • स्कूल शिफ्ट हो जाए, नाम बदल जाए, मैनेजमेंट बदले, फिर भी कोड आमतौर पर वही रहता है
  • कई जगह इसी कोड से स्कूल की मैपिंग बाकी पोर्टल्स पर भी हो जाती है

अगर आपके स्कूल का UDISE नंबर नहीं मिल रहा, तो अपने BEO/ABEO/CRC या जिला MIS टीम से कन्फर्म कर लें. गलत कोड के साथ एंट्री करना बाद में बहुत बड़ी दिक्कत बन जाती है.

UDISE+ डेटा क्यों इतना जरूरी है?

ये सिर्फ “फॉर्म भरना” नहीं है. इसके असर सीधे स्कूल तक आते हैं.

कुछ रियल चीजें जो UDISE+ डेटा से जुड़ी होती हैं:

  • ग्रांट और बजट
    • कई स्कीम्स में स्कूल की जरूरतें इसी डेटा से जज होती हैं
  • टीचर पोस्टिंग और सेक्शन स्वीकृति
    • छात्र संख्या और सेक्शन के आधार पर टीचर की मांग, PTR, सरप्लस, ये सब निकलता है
  • इंफ्रास्ट्रक्चर प्लानिंग
    • क्लासरूम, टॉयलेट, पानी, बिजली, ICT, लाइब्रेरी. किस स्कूल में क्या कमी है, उसका बेस
  • रिपोर्टिंग और रैंकिंग
  • जिला, ब्लॉक, राज्य स्तर पर रिपोर्ट बनती है. कभी-कभी स्कूल पर भी दबाव आता है कि डेटा पूरा और सही हो

मतलब. गलत डेटा केवल पोर्टल पर गलत नहीं रहता, वो फैसलों में भी गलत बन जाता है.

इसी तरह ऊर्जा से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार के लिए सरकार pm kusum जैसी योजनाएं भी चलाती है, जिससे सोलर पावर को बढ़ावा मिलता है।

UDISE+ 2026 में स्कूल डेटा एंट्री में क्या क्या आता है?

हर राज्य में स्क्रीन का नाम थोड़ा बदल सकता है, लेकिन आम तौर पर ये सेक्शन मिलते हैं:

  • स्कूल प्रोफाइल (नाम, लोकेशन, मैनेजमेंट, प्रकार)
  • कक्षाएं (कौन सी कक्षा तक स्कूल चलता है)
  • इंफ्रास्ट्रक्चर (कमरे, टॉयलेट, बाउंड्री, बिजली, पानी)
  • ICT/डिजिटल सुविधाएं
  • शिक्षक और स्टाफ (टाइप, ट्रेनिंग, विषय)
  • छात्र एनरोलमेंट (क्लास वाइज, जेंडर वाइज, कैटेगरी वाइज)
  • CWSN (दिव्यांगता संबंधित डेटा)
  • RTE/फीस/सेवाएं (कुछ राज्यों में अलग)
  • परीक्षा परिणाम, ड्रॉपआउट, ट्रांजिशन (जहां लागू हो)

आपको ये समझना है कि ये Annual Data Capture (ADC) जैसा होता है. यानी सालाना कैप्चर.

डेटा एंट्री शुरू करने से पहले तैयारी

यहीं पर 70% गलतियां रुक सकती हैं, अगर आप पहले से तैयारी कर लें.

1) पिछले साल का डेटा निकालें

पिछले साल की PDF/प्रिंट कॉपी अगर है, तो पास रखें.

कई चीजें वही रहती हैं. और तुलना करने में मदद मिलती है कि अचानक एनरोलमेंट दोगुनी तो नहीं हो गई, या टॉयलेट कम तो नहीं हो गए.

2) जरूरी दस्तावेज पास रखें

कम से कम ये चीजें साथ रखिए:

  • स्कूल रजिस्टर/प्रवेश पंजी
  • क्लास वाइज एनरोलमेंट शीट
  • स्टाफ विवरण (नाम, पद, विषय, नियुक्ति प्रकार)
  • कक्षाओं की संख्या और सेक्शन
  • भवन/कमरे/टॉयलेट की वास्तविक संख्या
  • पानी, बिजली, इंटरनेट, कंप्यूटर की स्थिति

और हां, “अनुमान” से भरने की आदत से बचें. बाद में निरीक्षण में फंसते हैं लोग.

3) एक छोटा सा वेरिफिकेशन राउंड कर लें

स्कूल में एक चक्कर लगाइए और लिख लीजिए:

  • कुल क्लासरूम कितने, उपयोग में कितने
  • लड़के और लड़कियों के टॉयलेट, और कितने वर्किंग
  • हैंडवॉश, पीने का पानी, बिजली
  • रैंप, हैंडरेल, CWSN सुविधाएं
  • फर्नीचर, लैब, लाइब्रेरी

कागज पर लिख लें. फिर वही पोर्टल में डालें. दिमाग में रखकर भरेंगे तो मिसमैच होता है.

UDISE+ लॉगिन कैसे होता है?

अधिकतर राज्यों में UDISE+ पोर्टल पर स्कूल को लॉगिन क्रेडेंशियल मिलता है:

  • UDISE कोड या स्कूल यूजरनेम
  • पासवर्ड
  • कभी कभी OTP आधारित लॉगिन

अगर पासवर्ड भूल गए हैं तो अपने ब्लॉक MIS/CRC से रीसेट कराएं. खुद से बार-बार ट्राय करके अकाउंट लॉक न कर दें.

स्कूल डेटा एंट्री: सेक्शनवाइज आसान गाइड

कौन सा सेक्शन कैसे भरना है?

A) स्कूल प्रोफाइल (School Profile)

यहां सबसे ज्यादा ध्यान इस पर दें:

  • स्कूल का नाम, पता, ग्राम/वार्ड, पिन
  • मैनेजमेंट टाइप (Govt, Aided, Pvt, Madarsa आदि)
  • स्कूल का प्रकार (Primary, Upper Primary, Secondary, Sr Secondary)
  • को-एड/बॉयज/गर्ल्स
  • ग्रामीण/शहरी
  • बोर्ड और अफिलिएशन (जहां लागू)

टिप: अगर स्कूल का नाम या पता बदल गया है, तो “खुद से” एडिट करके सेव कर देना हर जगह संभव नहीं होता. कई बार ये लॉक रहता है और सुधार के लिए ऊपर लेवल पर रिक्वेस्ट जाती है. तो जो भी बदलाव हो, सही प्रक्रिया से करवाएं.

B) कक्षाएं और सेक्शन (Classes & Sections)

यहां दो चीजें क्लियर रखें:

  • स्कूल में कौन कौन सी कक्षाएं चल रही हैं
  • हर कक्षा में सेक्शन कितने हैं

उदाहरण: कक्षा 6 में 2 सेक्शन हैं, 7 में 1 सेक्शन.

यहीं से कई गणनाएं निकलती हैं. PTR, क्लासरूम की जरूरत, टीचर की मांग.

C) इंफ्रास्ट्रक्चर (Infrastructure)

ये सेक्शन थोड़ा लंबा होता है. लेकिन तर्क सीधा है.

  • कुल कमरे (क्लासरूम)
  • उपयोग में कमरे
  • खराब/डैमेज कमरे (अगर ऑप्शन है)
  • ऑफिस, स्टोर, हेडमास्टर रूम (जहां पूछा जाए)
  • बाउंड्री वॉल
  • बिजली कनेक्शन
  • पेयजल (स्रोत, उपलब्धता)
  • हैंडवॉश सुविधा

टॉयलेट वाला हिस्सा ध्यान से:

  • लड़के/लड़कियों के टॉयलेट अलग अलग
  • कुल और “कार्यशील” (functional)
  • दिव्यांग अनुकूल टॉयलेट (अगर है)
  • साफ सफाई की व्यवस्था

बहुत लोग कुल टॉयलेट तो सही भर देते हैं, functional गलत भरते हैं. और फिर रिपोर्ट में स्कूल खराब दिखता है.

D) ICT और डिजिटल सुविधाएं

यहां आमतौर पर ये पूछा जाता है:

  • कंप्यूटर/लैपटॉप की संख्या
  • इंटरनेट कनेक्शन
  • स्मार्ट क्लास/डिजिटल बोर्ड
  • बिजली बैकअप (कुछ जगह)

याद रखें: “पड़ा है” और “चल रहा है” अलग चीज है. अगर सिस्टम functional पूछ रहा है तो वही भरें.

E) शिक्षक और स्टाफ विवरण (Teachers & Staff)

यहां गलती की गुंजाइश ज्यादा है क्योंकि डेटा बहुत डिटेल में होता है.

  • कुल शिक्षक (regular/contract/guest)
  • लिंग, सामाजिक श्रेणी (जहां पूछा जाए)
  • ट्रेनिंग/प्रोफेशनल क्वालिफिकेशन
  • विषय (Math, Science, SST, Hindi, English)
  • HM/Principal की एंट्री
  • नॉन टीचिंग स्टाफ (क्लर्क, चपरासी आदि)

टिप:

टीचर्स की संख्या और छात्र संख्या मिसमैच होने पर सिस्टम कभी-कभी फ्लैग करता है. इसलिए स्टाफ सूची अपडेटेड रखें. ट्रांसफर हो चुके शिक्षक को हटाना, नए जॉइन किए शिक्षक को जोड़ना. ये बेसिक है, लेकिन अक्सर छूट जाता है.

F) छात्र एनरोलमेंट (Student Enrollment)

ये सबसे संवेदनशील सेक्शन है.

आम तौर पर क्लास वाइज भरना होता है:

  • कक्षा 1 से 12 तक (जहां लागू)
  • लड़के और लड़कियां
  • SC/ST/OBC/GEN (या राज्य अनुसार कैटेगरी)
  • कभी कभी Minority भी

यहां क्या ध्यान रखें:

  • प्रवेश पंजी/UDISE रजिस्टर से ही भरें
  • “जो पढ़ रहे हैं” वही. जो TC ले चुके हैं, उनको मत जोड़ें
  • अगर mid year dropout हुए हैं और सिस्टम उस तरह से पूछ रहा है तो उसी नियम से

और हां. एक आम गलती.

लोग कुल संख्या सही भरते हैं, लेकिन कैटेगरी ब्रेकअप जोड़ने पर टोटल मैच नहीं करता. सेव नहीं होता, तो पहले ही जोड़कर देख लें.

G) CWSN (Children With Special Needs)

यहां संवेदनशीलता भी है और डेटा की शुद्धता भी.

  • कितने CWSN छात्र हैं
  • किस प्रकार की disability category
  • सुविधाएं: रैंप, रेलिंग, रिसोर्स रूम (जहां पूछा जाए)

अगर स्कूल में official रूप से पहचान नहीं हुई है, तो “अंदाजे” से न भरें. CRC/Inclusive Education टीम से कन्फर्म करके भरना बेहतर रहता है.

H) परिणाम और ट्रांजिशन (जहां पूछा जाए)

कुछ पोर्टल्स में पिछले साल के:

  • पास प्रतिशत
  • बोर्ड रिजल्ट
  • ड्रॉपआउट
  • ट्रांजिशन (5 से 6, 8 से 9, 10 के बाद आगे)

ये डेटा भी वास्तविक रिकॉर्ड से भरें. अनुमान से स्कूल का प्रदर्शन अजीब दिखता है.

UDISE+ डेटा एंट्री करते समय सबसे कॉमन गलतियाँ ये वो चीजें हैं जो हर साल होती हैं. सच में.

  • टॉयलेट functional गलत

कुल और functional गड़बड़. रिपोर्ट में स्कूल खराब दिखता है.

  • सेक्शन और एनरोलमेंट mismatch

1 सेक्शन दिखा रहे हैं लेकिन बच्चों की संख्या 150. सिस्टम को शक होगा.

  • ट्रांसफर हुए टीचर अभी भी ऐड
    • और नए टीचर लिस्ट में नहीं. PTR गलत निकलता है.
  • स्कूल प्रोफाइल में मैनेजमेंट टाइप गलत

एक बार गलत हो गया तो बदलवाना मुश्किल होता है.

  • पानी, बिजली, इंटरनेट को “हाँ” कर देना

क्योंकि अच्छा लगता है. लेकिन फिर भौतिक सत्यापन में समस्या.

  • डेटा सेव तो हो गया, लेकिन फाइनल सबमिट नहीं किया

कई लोग यही भूल जाते हैं. डेडलाइन निकल जाती है.

सबमिट करने से पहले अपनी छोटी सी चेकलिस्ट

फाइनल सबमिट से पहले 10 मिनट निकालकर ये कर लें:

  • कुल एनरोलमेंट और कैटेगरी योग मैच कर रहे हैं?
  • टॉयलेट: कुल और functional सही?
  • क्लासरूम संख्या वास्तविक है?
  • शिक्षक संख्या अपडेट?
  • कक्षाएं और सेक्शन सही हैं?
  • CWSN डेटा कन्फर्म?
  • हर सेक्शन में “Save” हुआ?
  • Final Submit/Freeze/Lock (जो भी ऑप्शन हो) कर दिया?

और अगर सिस्टम “Preview” PDF देता है, तो निकाल लें. PDF देखकर गलती जल्दी पकड़ में आती है.

डेडलाइन, लॉकिंग, और सुधार (Correction) का सच

UDISE+ में अक्सर ये होता है:

  • पहले डेटा एंट्री विंडो खुलती है
  • फिर ब्लॉक/जिला स्तर पर वेरिफिकेशन
  • फिर डेटा लॉक या फ्रीज
  • और बाद में correction window (अगर राज्य दे)

तो अगर आपने गलती कर दी है, घबराएं नहीं. लेकिन चुप भी मत बैठिए.

अपने CRC/BEO को लिखित में बताइए कि कौन सी फील्ड गलत हो गई, और सही क्या है. कई बार स्क्रीनशॉट भी काम आता है.

2026 में UDISE+ भरते समय एक practical सलाह

आप अकेले मत बैठिए.

कम से कम 2 लोग रखें:

  • एक व्यक्ति पोर्टल पर भर रहा हो
  • दूसरा व्यक्ति रिकॉर्ड देखकर बोल रहा हो और टिक कर रहा हो

ये छोटा सा सिस्टम गलतियां आधी कर देता है. और टाइम भी बचता है, क्योंकि बार-बार वापस जाकर सुधार नहीं करना पड़ता.

निष्कर्ष

UDISE+ एक सरकारी पोर्टल जरूर है, लेकिन आपके स्कूल की कहानी भी वहीं लिखी जाती है, कितने बच्चे हैं, क्या सुविधाएं हैं, क्या कमी है, क्या जरूरत है. सब.

तो इसे बस “फॉर्म” मत समझिए. और हां, परफेक्ट पहली बार में नहीं होता. लेकिन अगर आप तैयारी करके, रिकॉर्ड देखकर, और फाइनल सबमिट से पहले चेकलिस्ट लगाकर भरते हैं, तो 2026 की UDISE+ डेटा एंट्री काफी स्मूद हो जाती है.

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

 

Q1. UDISE+ क्या है और इसका उद्देश्य क्या है?

UDISE+ का पूरा नाम Unified District Information System for Education Plus है। यह भारत सरकार (MoE) का एक सिस्टम है जिसमें देश के सभी स्कूलों का डेटा एक जगह इकट्ठा किया जाता है। इसका उद्देश्य स्कूलों की पहचान, इंफ्रास्ट्रक्चर, शिक्षक, छात्र, सुविधाएं, परिणाम, और नामांकन जैसी जानकारियों को व्यवस्थित करना और सरकारी योजनाओं में सही डेटा प्रदान करना है।

Q2. UDISE+ नंबर क्या होता है और इसकी जरूरत क्यों होती है?

हर स्कूल को एक UDISE Code या UDISE Number दिया जाता है जो उस स्कूल की विशिष्ट पहचान करता है। यह नंबर स्कूल के डेटा एंट्री, ट्रैकिंग और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

Q3. स्कूलों को UDISE+ डेटा भरते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

डेटा भरते समय स्क्रीन पर दिख रहे सेक्शन और कोड्स को ध्यान से समझना चाहिए। गलत जानकारी भरने से ब्लॉक अथॉरिटी से फोन आ सकता है। इसलिए सावधानीपूर्वक और सही जानकारी भरना जरूरी होता है।

Q4. UDISE+ डेटा किस प्रकार सरकारी योजनाओं में उपयोग होता है?

UDISE+ में जमा किया गया डेटा यह निर्धारित करता है कि पैसे कहां खर्च होंगे, किस स्कूल में शिक्षक की जरूरत है, कितने कमरे कम हैं, और लड़कियों के नामांकन की स्थिति क्या है। इस प्रकार यह योजना बनाने और संसाधन आवंटित करने में सहायक होता है।

Q5. क्या UDISE+ डेटा हर साल अपडेट किया जाता है?

हाँ, हर साल स्कूलों का डेटा एक फॉर्म की तरह UDISE+ में अपडेट किया जाता है ताकि नवीनतम जानकारी उपलब्ध हो सके और सरकारी योजनाएं प्रभावी ढंग से लागू हो सकें।

Q6. UDISE+ सिस्टम पहली बार उपयोग करने वालों के लिए इसे कैसे आसान बनाया जा सकता है?

पहली बार UDISE+ डेटा भरना थोड़ा जटिल लग सकता है क्योंकि इसमें कई सेक्शन और कोड होते हैं। इसे आसान बनाने के लिए प्रैक्टिकल गाइड का पालन करें, प्रत्येक सेक्शन को समझें, और जरूरत पड़ने पर ब्लॉक अथॉरिटी से मदद लें।

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